Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 4 - देवनागरी
नलिनीदलगत जलमतितरलं
तद्वज्जीवितमतिशयचपलम्।
विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं
लोकं शोकहतं च समस्तम्॥ ४॥
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