Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 3 - देवनागरी
नारीस्तनभर नाभीदेशं
दृष्ट्वा मागामोहावेशम्।
एतन्मांसवसादि विकारं
मनसि विचिन्तय वारं वारम्॥ ३॥
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