Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 2 - देवनागरी
मूढ जहीहि धनागमतृष्णां
कुरु सद्बुद्धिमनसो वृत्तिम्।
यल्लभसे निजकर्मोपात्तं
वित्तं तेन विनोदय चित्तम्॥ २॥
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