Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 26 - देवनागरी
कामं क्रोधं लोभं मोहं
त्यक्त्वाऽत्मानं भावय कोऽहम्।
आत्मज्ञानविहीना मूढास्
ते पच्यन्ते नरकनिगूढाः॥ २६॥
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