Shikshak Digital Publishing - Spiritual Music and Devotional Content

श्लोक 25 - देवनागरी

शत्रौ मित्रे पुत्रे बन्धौ मा कुरु यत्नं विग्रहसन्धौ। सर्वस्मिन्नपि पश्यात्मानं सर्वत्रोत्सृज भेदाज्ञानम्॥ २५॥
5 में से 1
नेविगेट करने के लिए तीर का उपयोग करें
पिछला33 में से श्लोक 25अगला