Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 27 - देवनागरी
गेयं गीताजाम सहस्रं
ध्येयं श्रीपतिरूपमजस्रम्।
नेयं सज्जनसङ्गे चित्तं
देयं दीनजनाय च वित्तम्॥ २७॥
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