Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 12 - देवनागरी
दिनयामिन्यौ सायं प्रातः
शिशिरवसन्तौ पुनरायातः।
कालः क्रीडति गच्छत्यायुः
तदपि न मुञ्चत्याशावायुः॥ १२॥
5 में से 1
नेविगेट करने के लिए तीर का उपयोग करें

Subscribe for new verses
