Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 11 - देवनागरी
मा कुरु धनजनयौवनगर्वं
हरति निमेषात्कालः सर्वम्।
मायामयमिदमखिलं हित्वा
ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा॥ ११॥
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