Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 13 - देवनागरी
का ते कान्ता धन गत चिन्ता
वातुल किं तव नास्ति नियन्ता ।
त्रिजगति सज्जन सङ्गतिरेका
भवति भवार्णव तरणे नौका ॥१३॥
5 में से 1
नेविगेट करने के लिए तीर का उपयोग करें

Subscribe for new verses
