Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 10 - देवनागरी
वयसिगते कः कामविकारः
शुष्के नीरे कः कासारः।
क्षीणे वित्ते कः परिवारः
ज्ञाते तत्त्वे कः संसारः॥ १०॥
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