Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 8 - देवनागरी
का ते कान्ता कस्ते पुत्रः
संसारोऽयमतीव विचित्रः।
कस्य त्वं कः कुत आयातः
तत्त्वं चिन्तय तदिह भ्रातः॥ ८॥
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