Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 7 - देवनागरी
बालस्तावत् क्रीडासक्तः
तरुणस्तावत् तरुणीसक्तः।
वृद्धस्तावच्चिन्तासक्तः
परमे ब्रह्मणि कोऽपि न सक्तः॥ ७॥
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