Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 29 - देवनागरी
अर्थमनर्थं भावय नित्यं
नास्ति ततः सुखलेशः सत्यम्।
पुत्रादपि धनभाजां भीतिः
सर्वत्रैषा विहिता रीतिः॥ २९॥
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