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श्लोक 21 - देवनागरी

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननी जठरे शयनम्। इह संसारे बहुदुस्तारे कृपयाऽपारे पाहि मुरारे॥ २१॥
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