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श्लोक 20 - देवनागरी

भगवद्गीता किञ्चिदधीता गङ्गाजललवकणिकापीता। सकृदपि येन मुरारिसमर्चा क्रियते तस्य यमेन न चर्चा॥ २०॥
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