కబీర్ దోహా 3 - దోహా
झीनी झीनी बीनी चदरिया।
काह के ताना, काह के भरनी,
कौन तार से बीनी चदरिया॥
इंगला पिंगला ताना भरनी,
सुषुम्ना तार से बीनी चदरिया॥
अष्ट कमल दल चरखा डोले,
पाँच तत्त्व, गुण तीनी चदरिया॥
साईं को सियत मस दस लागे,
ठोंक-ठोंक के बीनी चदरिया॥
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी,
ओढ़ी के मैली कीनी चदरिया॥
दास कबीर जतन करि ओढ़ी,
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया॥
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