Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 32 - देवनागरी
मूढः कश्चन वैयाकरणो
डुकृञ्करणाध्ययन धुरीणः।
श्रीमच्छङ्कर भगवच्छिष्यैः
बोधित आसीच्छोदित करणैः॥ ३२॥
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