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श्लोक 23 - देवनागरी

कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः का मे जननी को मे तातः। इति परिभावय सर्वमसारं विश्वं त्यक्त्वा स्वप्नविचारम्॥ २३॥
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