Original text by Jagadguru Sri Adi Sankaracharya · Music & commentary by Hari Kavi (B Harikrishna)
श्लोक 16 - देवनागरी
अग्रे वह्निः पृष्ठे भानुः
रात्रौ चुबुकसमर्पितजानुः।
करतलभिक्षस्तरुतलवासः
तदपि न मुञ्चत्याशापाशः॥ १६॥
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